दीप, दीपक, दीवा या दीया वह पात्र है जिसमें सूत की बाती और तेल या
घी रख कर ज्योति प्रज्वलित की जाती है। पारंपरिक दीया मिट्टी का होता है
लेकिन धातु के दीये भी प्रचलन में हैं। प्राचीनकाल में इसका प्रयोग प्रकाश
के लिए किया जाता था पर देवपूजा में दीपक का बड़ा महत्त्व माना गया है। सामान्यतया घी या तेल के
दीपक जलाने की परंपरा रही है। पूजा के समय दीपक कैसा हो, उसमें कितनी
बत्तियां हो यह जानना बेहद रोचक व महत्वपूर्ण भी होता है।
दीपक जलाते समय यह मंत्र अवष्य बोलना चाहिए।
अनुष्ठान में पांच दीपक प्रज्जवलित करने का बहुत महत्व है। इसमें सोना, चांदी, कांसा, तांबा, लोहा आदि धातुओं का प्रयोग होता है। धन के आभाव में पांचों दिये तांम्बे के हो सकते हैं। जीवन के लिए प्राणीमात्र को प्रकाश चाहिए। बिना प्रकाश के वह कोई भी कार्य नहीं कर सकता। सबसे अधिक महत्वपूर्ण प्रकाश सूर्य का है। इसके प्रकाश में अन्य सभी प्रकाश समाये रहते हैं इसीलिए कहा गया है-
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति के हाथ में सूर्य की रेखा स्पष्ट बलवान होती है या कुंडली में सूर्य की स्थिति उत्तम, निर्दोष तथा बलवान होती है, वह धनवान, कीर्तिवान, ऐष्वर्यवान होता है और दूसरे के मुकाबले भारी पड़ता है। वह बुराई से दूर रहता है इसलिए पूजापाठ में सबसे पहले ज्योति जलाकर प्रार्थना की जाती है कि कार्य पूर्ण होने तक स्थिर रह कर साक्षी रहें। दीपक जलाते समय उसके नीचे सप्तधान्य (सात अनाज) रखने से सब प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यदि दीपक जलाते समय उसके नीचे गेहूं रखें तो धन धान्य की वृद्धि होती है। यदि दीपक जलाते समय उसके नीचे चावल रखें तो महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी। इसी प्रकार यदि उसके नीचे काले तिल या उड़द रखें तो स्वयं माँ काली भैरवी, शनि, दस, दिक्पाल, क्षेत्रपाल हमारी रक्षा करते हैं। इसलिए दीपक के नीचे किसी न किसी अनाज को रखा जाना चाहिए साथ में जलते दीपक के अंदर अगर गुलाब की पंखुड़ी या लौंग रखें, तो जीवन अनेक प्रकार की सुगंधियों से भर उठेगा।
सोने का दीपकः- सोने के दीपक को वेदी के मध्य भाग में गेहूं का आसन देकर चारों तरफ लाल कमल या गुलाब के फूल की पंखुड़ियां बिखेर कर स्थापित करें इसमें गाय का शुद्ध घी डालें तथा बŸा लंबी बनाएं और इसका मुख पूर्व की ओर करें सोने के दीपक में गाय का शुद्ध घी डालने से घर में हर प्रकार की उन्नति तथा बुद्धि में निरंतर वृद्धि होती रहेगी। बुद्धि सचेत रहेगी। बुरी वृŸायों से सावधान करती रहेगी तथा धन सही स्त्रोत से प्राप्त होगा।
चांदी का दीपकः- चांदी के दीपक को चावलों का आसन देकर सफेद गुलाब या अन्य सफेद फूलों की पंखुड़ियों को चारों तरफ बिखेर कर पूर्व दिशा में स्थापित करें इसमें गाय का शुद्ध देषी घी का प्रयोग करें। चांदी का दीपक जलाने से घर में सात्विक धन की वृद्धि होगी।
तांबे का दीपकः- तांबे के दीपक को लाल मसूर की दाल का आसन देकर चारों तरफ लाल फूलों की पंखुड़ियों को बिखेर कर दक्षिण दिशा में स्थापित करें इसमें तिल का तेल डालें और बŸा लंबी जलाए। तांबे के दीपक में तिल का तेल डालने से मनोबल में वृद्धि होगी तथा अनिष्टों का नाष होगा।
कांसे का दीपकः- कांसे के दीपक को चने की दाल का आसन देकर तथा चारों तरफ पीले फूलों की पंखुड़ियां बिखेर कर उत्तर दिशा में स्थापित करें इसमें तिल का तेल डालें कांसे का दीपक जलाने से धन की स्थिरता बनी रहती है अर्थात् जीवन पर्याप्त धन बना रहता है।
लोहे का दीपकः- लोहे के दीपक को उड़द की दाल का आसन देकर चारों तरफ कालें या गहरे नीले रंग के पुष्पों की पंखुड़ियां बिखेर कर पष्चिम दिशा में स्थापित करें इसमें सरसों का तेल डालें लोहे के दीपक में सरसों के तेल की ज्योति जलाने से अनिष्ट तथा दुर्घटनाओं से बचाव हो जाता है।
घी के दीपक में सफेद रुई और तेल के दीपक में लाल धागे की बत्ती का इस्तेमाल करना चाहिए।
ग्रहों की पीड़ा निवारण हेतुः-
किसी भी पूजा में पहले नवग्रहों को (चावलों से चोकी पर) बनाया जाता है वैसे ही चौकी के मध्य में दीपक को रखा जाता है।
सोने के दीपक में सूर्य व गुरु का वास होता है, चांदी के दीपक में चन्द्र व शुक्र, तांम्बे के दीपक में मंगल, कांसे में बुध, लोहे के दीपक में शनि का वास है। कुण्डली में जो गृह कमजोर हो उस धातु का दीपक इस्तेमाल करना चाहिए। माना जाता है कि सूर्य के चारों तरफ आकाष में उससे आकर्षित होकर सभी ग्रह उसकी परिक्रमा करते रहते हैं और उनके उपग्रह अपने-अपने ग्रह के साथ सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं उसी प्रकार अन्य दीपक सोने के दीपक के चारों तरफ स्थापित किए जाते हैं मिट्टी या आटे का दीपक एक बार जल कर अषुद्ध हो जाता है उसे दोबारा प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। यह दीपक पीपल के नीचे एवं क्षेत्रपाल के लिए विषेष रूप से प्रयोग किया जाता है।
इस प्रकार पांच दीपकों को जलाने से सभी ग्रह अनुकूल हो जाते हैं साथ ही अन्य देवता प्रसन्न होते है इससे तीनों बल, बुद्धिबल, धनबल और देहबल की वृद्धि होती है और विध्न बाधाएं दूर हो जाती है इस प्रकार यह दीप ज्योति जहां जप पूजा की साक्षी होती है, वहीं वह जीवन में इतना उपकार भी करती है। इस प्रकार जातक गृहों की कृपा प्राप्त कर लेता है।
दीपक जलाते समय यह मंत्र अवष्य बोलना चाहिए।
ऊँ अग्नि ज्योतिः परंबह्म दीपो ज्योतिर्जनारदनः। दीपो हरतु मे पापं, दीप ज्योतिः नमोस्तुते।।हमारे धर्मों और शास्त्रों में विषम संख्या में दीपक जलाया जलाने की परम्परा हैं क्योंकि विषम संख्याओ को शुभ माना जाता है ।ऐसा माना जाता है कि दीपक प्रज्वलित करके हम अपने जीवन के अज्ञान का अंधकार मिटाकर ज्ञान का प्रकाश करते हैं ।
विभिन्न प्रकार के दीप और उनका महत्वः-
देवताओं के सम्मुख उनके तत्व के आधार पर दीपक जलाये जाते हैं जैसे माँ भगवती के लिए तिल के तेल का दीपक तथा मौली की बाती उत्तम मानी गई है। देवताओं को प्रसन्न करने के लिए देसी घी का दीपक जलाना चाहिए। वहीं शत्रु का शमन करने के लिए सरसों व चमेली का तेल सर्वोत्तम माने गए हैं।देवताओं के अनुकूल दियो को जलाने का भी योग है जैसे
- सूर्य नारायण कि पूजा एक साथ सात दियो से करने का विषेष महत्व है।
- माता भगवती को नौ दियो का दीपक अर्पित करना सर्वोत्तम कहा गया है।
- हनुमानजी एवं शंकरजी कि प्रसन्नता के लिए पांच दियो का दीपक जलाने का विधान है।
- भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति के लिए तीन बत्तियों वाला घी का दीपक जलाएं।
- दो मुखी घी वाला दीपक माता सरस्वती की आराधना के समय और शिक्षा प्राप्ति के लिए जलाना चाहिए।
- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए दीपक सामान्य गहरा होना चाहिए।
- इष्ट सिद्धि, ज्ञान प्राप्ति के लिए गहरा और गोल दीपक प्रयोग में लें।
- शत्रुनाश, आपत्ति निवारण के लिए मध्य में से ऊपर उठा हुआ दीपक इस्तेमाल करें।
- दीपावली के दिन सात मुखी दीपक मां के सामने जरुर जलाएं।
- राहु और केतु ग्रहों की दशा को शांत करने के लिए अलसी के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
- शत्रुओं से मुक्ति पाने के लिए भैरवजी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है।
अनुष्ठान में पांच दीपक प्रज्जवलित करने का बहुत महत्व है। इसमें सोना, चांदी, कांसा, तांबा, लोहा आदि धातुओं का प्रयोग होता है। धन के आभाव में पांचों दिये तांम्बे के हो सकते हैं। जीवन के लिए प्राणीमात्र को प्रकाश चाहिए। बिना प्रकाश के वह कोई भी कार्य नहीं कर सकता। सबसे अधिक महत्वपूर्ण प्रकाश सूर्य का है। इसके प्रकाश में अन्य सभी प्रकाश समाये रहते हैं इसीलिए कहा गया है-
शुभं करोति कल्याण आरोग्यं सुख संपदत्।शत्रु बुद्धि विनाषं च दीपज्योतिः नमोस्तुते।।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति के हाथ में सूर्य की रेखा स्पष्ट बलवान होती है या कुंडली में सूर्य की स्थिति उत्तम, निर्दोष तथा बलवान होती है, वह धनवान, कीर्तिवान, ऐष्वर्यवान होता है और दूसरे के मुकाबले भारी पड़ता है। वह बुराई से दूर रहता है इसलिए पूजापाठ में सबसे पहले ज्योति जलाकर प्रार्थना की जाती है कि कार्य पूर्ण होने तक स्थिर रह कर साक्षी रहें। दीपक जलाते समय उसके नीचे सप्तधान्य (सात अनाज) रखने से सब प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यदि दीपक जलाते समय उसके नीचे गेहूं रखें तो धन धान्य की वृद्धि होती है। यदि दीपक जलाते समय उसके नीचे चावल रखें तो महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी। इसी प्रकार यदि उसके नीचे काले तिल या उड़द रखें तो स्वयं माँ काली भैरवी, शनि, दस, दिक्पाल, क्षेत्रपाल हमारी रक्षा करते हैं। इसलिए दीपक के नीचे किसी न किसी अनाज को रखा जाना चाहिए साथ में जलते दीपक के अंदर अगर गुलाब की पंखुड़ी या लौंग रखें, तो जीवन अनेक प्रकार की सुगंधियों से भर उठेगा।
भिन्न-भिन्न दीपक और उनसे सफल होने वाली मनोकामना-
सोने का दीपकः- सोने के दीपक को वेदी के मध्य भाग में गेहूं का आसन देकर चारों तरफ लाल कमल या गुलाब के फूल की पंखुड़ियां बिखेर कर स्थापित करें इसमें गाय का शुद्ध घी डालें तथा बŸा लंबी बनाएं और इसका मुख पूर्व की ओर करें सोने के दीपक में गाय का शुद्ध घी डालने से घर में हर प्रकार की उन्नति तथा बुद्धि में निरंतर वृद्धि होती रहेगी। बुद्धि सचेत रहेगी। बुरी वृŸायों से सावधान करती रहेगी तथा धन सही स्त्रोत से प्राप्त होगा।
चांदी का दीपकः- चांदी के दीपक को चावलों का आसन देकर सफेद गुलाब या अन्य सफेद फूलों की पंखुड़ियों को चारों तरफ बिखेर कर पूर्व दिशा में स्थापित करें इसमें गाय का शुद्ध देषी घी का प्रयोग करें। चांदी का दीपक जलाने से घर में सात्विक धन की वृद्धि होगी।
तांबे का दीपकः- तांबे के दीपक को लाल मसूर की दाल का आसन देकर चारों तरफ लाल फूलों की पंखुड़ियों को बिखेर कर दक्षिण दिशा में स्थापित करें इसमें तिल का तेल डालें और बŸा लंबी जलाए। तांबे के दीपक में तिल का तेल डालने से मनोबल में वृद्धि होगी तथा अनिष्टों का नाष होगा।
कांसे का दीपकः- कांसे के दीपक को चने की दाल का आसन देकर तथा चारों तरफ पीले फूलों की पंखुड़ियां बिखेर कर उत्तर दिशा में स्थापित करें इसमें तिल का तेल डालें कांसे का दीपक जलाने से धन की स्थिरता बनी रहती है अर्थात् जीवन पर्याप्त धन बना रहता है।
लोहे का दीपकः- लोहे के दीपक को उड़द की दाल का आसन देकर चारों तरफ कालें या गहरे नीले रंग के पुष्पों की पंखुड़ियां बिखेर कर पष्चिम दिशा में स्थापित करें इसमें सरसों का तेल डालें लोहे के दीपक में सरसों के तेल की ज्योति जलाने से अनिष्ट तथा दुर्घटनाओं से बचाव हो जाता है।
घी के दीपक में सफेद रुई और तेल के दीपक में लाल धागे की बत्ती का इस्तेमाल करना चाहिए।
ग्रहों की पीड़ा निवारण हेतुः-
किसी भी पूजा में पहले नवग्रहों को (चावलों से चोकी पर) बनाया जाता है वैसे ही चौकी के मध्य में दीपक को रखा जाता है।
सोने के दीपक में सूर्य व गुरु का वास होता है, चांदी के दीपक में चन्द्र व शुक्र, तांम्बे के दीपक में मंगल, कांसे में बुध, लोहे के दीपक में शनि का वास है। कुण्डली में जो गृह कमजोर हो उस धातु का दीपक इस्तेमाल करना चाहिए। माना जाता है कि सूर्य के चारों तरफ आकाष में उससे आकर्षित होकर सभी ग्रह उसकी परिक्रमा करते रहते हैं और उनके उपग्रह अपने-अपने ग्रह के साथ सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं उसी प्रकार अन्य दीपक सोने के दीपक के चारों तरफ स्थापित किए जाते हैं मिट्टी या आटे का दीपक एक बार जल कर अषुद्ध हो जाता है उसे दोबारा प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। यह दीपक पीपल के नीचे एवं क्षेत्रपाल के लिए विषेष रूप से प्रयोग किया जाता है।
इस प्रकार पांच दीपकों को जलाने से सभी ग्रह अनुकूल हो जाते हैं साथ ही अन्य देवता प्रसन्न होते है इससे तीनों बल, बुद्धिबल, धनबल और देहबल की वृद्धि होती है और विध्न बाधाएं दूर हो जाती है इस प्रकार यह दीप ज्योति जहां जप पूजा की साक्षी होती है, वहीं वह जीवन में इतना उपकार भी करती है। इस प्रकार जातक गृहों की कृपा प्राप्त कर लेता है।
दीपक की लौ और उसकी सही दिशा :-
- पूर्व दिशा की ओर रखने से आयु में वृद्धि होती है।
- पश्चिम दिशा की ओर रखने से दु:ख बढ़ता है।
- उत्तर दिशा की ओर रखने से धनलाभ होता है।
- दक्षिण दिशा की ओर रखने से हानि होती है।

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